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सब को दिल के दाग़ दिखाए एक तुझी को दिखा न सके
हो के उस कूचे से आई तो सितम ढा गई क्या
महसूस हो रहा है जो गम
अपनी तो उजालों को
आज तो रोने को जी हो जैसे
तन्हा उदास शब के सिवा कोई भी न था
आहें मुँह से मेरे निकलने दो
लम्हे नहीं तोड़ा करते
जाने कौन आस पास होता है
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