Fresh, Unheard Music
Not on the Internet
Watermarked Previews
Random
Latest
साज़िश छुपा रहा है चाँद
नज़र बचा के नज़र से गुज़र गया वो शख़्स
खबर है कि नहीं है
फिर कोई हादिसा हुआ ही नहीं
आज फिर रूह में इक बर्क़ सी लहराती है
दर्द हल्का है
ढूँढ़ने पे भी दिल का निशाँ नहीं मिलता
दिलबर से हम अपने जब मिलेंगे
आप क्या जानें मोहब्बत का तमाशा क्या है
←
Previous Page
Next Page
→