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ग़मों से रिश्ता है अपना भी दोस्ती की तरह
सितारों से भरा ये आसमाँ कैसा लगेगा
चाँदनी था कि ग़ज़ल था कि सबा था क्या था
बिछा हुआ कोई तन्हाइयों का जाल न था
साक़िया एक नज़र काफ़ी है बस अब के बरस
तुम से बिछड़ गए तो किसी से मिले न हम
तुम से बिछड़ गए तो किसी से मिले न हम
बस्ती मिली मकान मिले बाम-ओ-दर मिले
तेरी तस्वीर को धुँदला नहीं होने देंगे
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