Fresh, Unheard Music
Not on the Internet
Watermarked Previews
Random
Latest
जैसा हूँ वैसा क्यूँ हूँ समझा सकता था मैं
मोहब्बत की वो आहट पा न जाए
भूले से कभी ले जो कोई नाम हमारा
काँच के शहर में पत्थर न उठाओ यारो
जो शख़्स तुझ को फ़रिश्ता दिखाई देता है
तड़प रहा है दिल-ए-बे-क़रार आ जाओ
लम्हा वो तेरी याद का ऐसे गुज़र गया
ज़िंदगी अपनी हुई यार की फ़ितरत की तरह
ऐ दिल तुझे क्या वक़्त की पहचान नहीं है
←
Previous Page
Next Page
→