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बे-क़रारी सी बे-क़रारी है
वो बात बात पे जी भर के बोलने वाला
सभी की थी नज़र इस पर गरेबानों पे क्या गुज़री
साक़िया एक नज़र काफ़ी है बस अब के बरस
सिर्फ एक बार मोका देदे
नज़र नज़र से मिली दिल पुकार उठा कि नहीं
इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
जो शख़्स तुझ को फ़रिश्ता दिखाई देता है
सर-ए-शाम वो कभी आएँ तो
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