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बीते रिश्ते तलाश करती है
नज़र में अपनी कभी इस क़दर बुरा तो न था
दिल नया है न है ख़याल नया
तीरगी है शहर में
मोहब्बत की वो आहट पा न जाए
आप की याद आती रही रात भर
नज़र नज़र से मिली दिल पुकार उठा कि नहीं
एक मुद्दत से सर-ए-बाम वो आया भी नहीं
मैं पिछली रात क्या जाने कहाँ था
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