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उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से
क्या आँख मिलाओगे तुम देखने वालों से
ये किस हसीन ने लोगों को रोक रक्खा है
जिस तरफ़ जाओगे इक शोर सुनाई देगा
कभी होने से कभी दुख के न होने से हुआ
सुनी सुनाई वो आवाज़ मर ही जाने दो
अपने हाल-ए-दिल पे ख़ुद ही मुस्कुरा सकता हूँ मैं
दिल की हालत बयाँ नहीं होती
मायूसी की बर्फ़ पड़ी थी लेकिन मौसम सर्द न था
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