Fresh, Unheard Music
Not on the Internet
Watermarked Previews
Random
Latest
पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी
उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से
प्यार उन को देख कर बे-इख़्तियार आ ही गया
बे-निशान क़दमों की कहकशाँ पकड़ते हैं
तन्हाइयाँ जो रास न आएँ तो क्या करें
तुम पर नज़र नहीं
जज़्बात पर अपने इस कदर भी ना काबू रखो
ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है
राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
←
Previous Page
Next Page
→