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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
दिल नया है न है ख़याल नया
इस दौर की पलकों पे हैं आँसू की तरह हम
हुस्न से आँख लड़ी हो जैसे
रिश्तों की भीड़ में भी वो तन्हा खड़ा रहा
मुझ को जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले
कभी होने से कभी दुख के न होने से हुआ
जहाँ मैं हूँ वहाँ हालात का मंज़र नहीं बदला
वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं
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