Fresh, Unheard Music
Not on the Internet
Watermarked Previews
Random
Latest
अदा परियों की सूरत हूर की आँखें ग़ज़ालों की
लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला
नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जाना
इतना तो दोस्ती का सिला दीजिए मुझे
हल्का हल्का सुरूर है साक़ी
मिरा बदन है मगर मुझ से अजनबी है अभी
आसमाँ का सर्द सन्नाटा पिघलता जाएगा
ख़्वाबों के किसी मोड़ पे देखा सा लगे है
घर की कैद से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी
←
Previous Page
Next Page
→