Fresh, Unheard Music
Not on the Internet
Watermarked Previews
Random
Latest
होने लगे हैं रस्ते रस्ते आपस के टकराव बहुत
मेरे मकाँ से काश ये मंज़र दिखाई दे
जिन आँखों को पढ़ते पढ़ते ग़ज़लें कहना सीख गए
लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला
तुम ने भूले से कभी ये नहीं सोचा होगा
आज अचानक फिर ये कैसी ख़ुशबू फैली यादों की
किसी दर पे जाने को जी चाहता है
कल चौदवीं की रात थी
आप का ए’तिबार कौन करे
←
Previous Page
Next Page
→