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मिरा बदन है मगर मुझ से अजनबी है अभी
ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ
मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली
किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे
जब इश्क तुम्हें हो जाएगा
इतना तो दोस्ती का सिला दीजिए मुझे
दुखी दिलों में, दुखी साथियों में रहते थे
हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया
ख़ुशबू जैसे लोग
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