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उन को ये शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते
एक परी की ज़ुल्फ़ों में यूँ फँसा हुआ है चाँद
न पूछ हम से हमारी उड़ान छोड़ न यार
फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल
मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली
कल चौदवीं की रात थी
गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन
कोई आस-पास नहीं रहा तो ख़याल तेरी तरफ़ गया
जब इश्क तुम्हें हो जाएगा
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