Fresh, Unheard Music
Not on the Internet
Watermarked Previews
Random
Latest
कोई आने वाला नहीं इंतज़ार फिर भी करते हैं
अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं
नज़र बचा के नज़र से गुज़र गया वो शख़्स
आ गया वस्ल में उन को जो पसीना ठंडा
बिन मौसम के पानी बरसे सावन सावन धूप
सावन की पुर्वाई ने क्या दुखती चोट दिखाई है
बे-क़रारी सी बे-क़रारी है वस्ल है और फ़िराक़ तारी है
साक़िया एक नज़र काफ़ी है बस अब के बरस
नहीं मालूम अब की साल मय-ख़ाने पे क्या गुज़रा
Next Page
→