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बे-क़रारी सी बे-क़रारी है वस्ल है और फ़िराक़ तारी है
ज़िंदगी अपनी हुई यार की फ़ितरत की तरह
वो जो हर राह के हर मोड़ पर मिल जाता है
सावन की पुर्वाई ने क्या दुखती चोट दिखाई है
चेहरों को बे-नक़ाब समझने लगा था मैं
उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से
Daybreak
It’s Now And Here
It’s A Beautiful Day
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