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मैं पिछली रात क्या जाने कहाँ था
जुनूँ के जोश में फिरते हैं मारे मारे अब
पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी
ताज्जुब ये नहीं है ग़म के मारों को न चैन आया
बे-क़रारी सी बे-क़रारी है वस्ल है और फ़िराक़ तारी है
Zoom Into Me
था भुलाना जिन्हें फिर भी वही ग़म याद आए
दिल को इसी सबब से है इज़्तिराब शायद
वो जो हर राह के हर मोड़ पर मिल जाता है
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