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इतना सन्नाटा है बस्ती में कि डर जाएगा
अजीब तजरबा था भीड़ से गुज़रने का
Let Your Body Speak
Few Moments Of Love
चमन चमन से गुलों का यही पयाम आया
दुनिया से आज जज़्ब-ए-वफ़ा माँगता हूँ मैं
अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं
अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता
उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा
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