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मोहब्बत की वो आहट पा न जाए
करना जो मोहब्बत का इक़रार समझ लेना
हम ने सहरा को सजाया था गुलिस्ताँ की तरह
We Are The Fervor
नहीं मालूम अब की साल मय-ख़ाने पे क्या गुज़रा
वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं
बे-निशान क़दमों की कहकशाँ पकड़ते हैं
आपकी कमी सी है
ग़म का इज़हार भी करने नहीं देती दुनिया
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