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और तो कोई बस न चलेगा हिज्र के दर्द के मारों का
भले दिनों की बात है भली सी एक शक्ल थी
मायूसी की बर्फ़ पड़ी थी लेकिन मौसम सर्द न था
पन्ने यादो की किताब के जब भी हम पलटते हैं
जिस तरफ़ जाओगे इक शोर सुनाई देगा
कल चौदवीं की रात थी
दर्द हल्का है
न अब मुझ को सदा दो थक गया मैं
Where The Peaks Pierce The Sky
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