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बहुत दिनों से खुला दरतलाश करता हूँ
बिन मौसम के पानी बरसे सावन सावन धूप
न पूछ हम से हमारी उड़ान छोड़ न यार
नज़र बचा के नज़र से गुज़र गया वो शख़्स
जिंदगी की तलाश में
सितारों से भरा ये आसमाँ कैसा लगेगा
तू अजब याद आया
सावन की पुर्वाई ने क्या दुखती चोट दिखाई है
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