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चुप हो क्यों मैं ने कुछ कहा तो नहीं
तन्हा उदास शब के सिवा कोई भी न था
माँझी तेरी कश्ती के तलबगार बहुत हैं
आपकी याद आने के बाद
तुम ने जब घर में अंधेरों को बुला रक्खा है
बर्फ़ में ख़ुद को बदल कर देखना
लम्हा वो तेरी याद का ऐसे गुज़र गया
हर क़दम पर नए साँचे में ढल जाते हैं लोग
All Of You Or Nothing
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